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Sunday, August 3, 2008

एएमयू : पीएफ का मनमाना निवेश

अलीगढ़, 23 जून, 2008 www.jagran.com page 16

एएमयू : पीएफ का मनमाना निवेश

संवाददाता, अलीगढ़ : अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कर्मचारियों की भविष्य निधि की एफडी एएमयू कानून को धता बताते हुए फाइनेंस आफिस ने किसी अन्य बैंक में करा दी है, जबकि एक्ट और आर्डिनेंस में साफ निर्देश है कि इसका निवेश भारतीय स्टेट बैंक की एएमयू शाखा में ही किया जाए। इस बात का खुलासा एएमयू दर्शन शास्त्र विभाग में डा. तारिक उल इस्लाम द्वारा सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई सूचना में हुआ है। सूचना के अधिकार के तहत डा. तारिक उल इस्लाम ने 10 अप्रैल को एक सूचना मांगी थी। एएमयू के जनसूचना अधिकारी को भेजे पत्र में उन्होंने पूछा था कि एक अप्रैल 2007 से 10 अप्रैल 2008 तक कितनी राशि बैंक में जमा की गई, किस-किस खाते में की गई और राशि जमा की गई वह कहां से आई। इसके अलावा किस बैंक में यह राशि जमा हुई और कितनी ब्याज दर पर हुई। डा. तारिक उल इस्लाम ने प्रत्येक जमा धन और निकासी का पूरा ब्यौरा भी मांगा था। वीसी ने एक्ट 19 (3) (विशेषाधिकार) का प्रयोग करके श्रेयस ग्रामीण बैंक जमालपुर में कुछ धन जमा करने का निर्णय लिया था। सूचना अधिकार के तहत डा. तारिक उल इस्लाम ने उस निर्णय की कापी और ईसी द्वारा पास किए गए प्रस्ताव की कापी भी मांगी थी। मांगी गई जानकारी का जवाब सहायक फाइनेंस अफसर ने दिया है, जिसमें उन्होंने बताया है कि आठ करोड़ रुपये की एफडी 36 महीने के लिए जमालपुर स्थित श्रेयस ग्रामीण बैंक में कराई गई है। इसमें वीसी ने अपने विशेषाधिकार का प्रयोग किया है। प्रयोग के पीछे यह तर्क दिया गया है कि वे राशि पर मिलने वाले ब्याज का नुकसान नहीं होने देना चाहते थे, इसलिए एक्ट 19 (3) का प्रयोग करके एफडी कराई गई है। कर्मचारियों की भविष्यनिधि (पीएफ) की एफडी कई नियमों को धता बताते हुए किया गया है। एएमयू के स्टेच्यू 61 के अपेंडिक्स (ए) के क्लॉज 13 में भविष्य निधि के बारे में साफ तौर पर निर्देश दिए गए हैं। इसमें कहा गया है कि जीपीएफ का निवेश केवल भारतीय स्टेट बैंक की एएमयू ब्रांच में ही कर सकते हैं। इस क्लाज में आगे बताया गया है कि ईसी के निर्देश पर किसी राष्ट्रीयकृत बैंक अथवा पोस्ट आफिस में निवेश किया जा सकता है। इसके अलावा एएमयू के धन के निवेश को लेकर अन्य जगहों पर निर्देश दिए गए हैं। इसमें एक्जीक्यूटिव आर्डिनेंस के चेप्टर दो के क्लॉज दो में साफ कहा गया है कि यदि तीन हजार रुपये से ज्यादा जमा करने हैं तो ईसी की परमीशन के साथ केवल भारतीय स्टेट बैंक में ही जमा होंगे। उसमें यह भी बताया गया है कि यदि बैंक बदली जाएगी तो उसके लिए बाकायदा एग्जीक्यूटिव काउंसिल निर्देश देगी। ईसी की जानकारी के बिना किसी दूसरे बैंक में एफडी कराने को लेकर कुछ जानकार लोग वित्तीय अनियमितता की आशंका जाहिर कर रहे हैं। जानकारी मांगने वाले डा. तारिक उल इस्लाम वीसी के विशेषाधिकार के प्रयोग पर हैरत जाहिर करते हुए कहते हैं कि एक्ट 19 (2) वीसी को केवल एक्जीक्यूटिव और एकेडमिक अधिकार प्रदान करता है, इसमें वित्तीय मामले नहीं आते। डा. इस्लाम इस मामले में वीसी को नहीं फाइनेंस आफिस को दोषी मानते हैं। उन्होंने कहा कि एफडी की मैच्योरिटी की तारीख नजदीक आ रही है, यह पहले से ही पता होगा। वीसी ने एक साल में कई ईसी की बैठक बुलाई हैं, यदि फाइनेंस आफिस चाहता तो ईसी में यह मामला पास हो सकता था।

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