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Saturday, September 15, 2012

उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को एक कैंसर सर्जन का खुला पत्रः


श्रीमान, गुटका पर पाबन्दी लगाने में यह टाल-मटोल क्यों?

सेवा में,
श्री अखिलेश यादव
माननीय मुख्य मंत्रीउत्तर प्रदेश
पांचवी मंजिललाल बहादुर शास्त्री भवन,
उत्तर प्रदेश सचिवालयलखनऊ।

15 सितंबर2012

प्रिय अखिलेश जी,
नमस्कार। आरंभ मेंमैं आपको उत्तर प्रदेश का सबसे युवा मुख्य मंत्रीऔर शायद पूरे देश में सबसे युवा मुख्य मंत्री बनने पर बधाई देता हूँ। पूरे राष्ट्र की निगाह आप पर टिकी हुई है। हमें पूरी उम्मीद है कि आपके शासन में उत्तर प्रदेश की सरकार प्रगतिशील और गतिशील रहेगी जो आपके नवयुवा व्यक्तित्व के अनुरूप है।
मैं विनम्रतापूर्वक अपना परिचय देना चाहता हूँ। मैं मुम्बई स्थित टाटा मैमोरियल अस्पताल में जो कैंसर के निदान एवं उपचार के लिए एक प्रतिष्ठित अस्पताल हैएक कंसल्टेंट सर्जन हूँ। हरेक मंगलवार और बृहस्पतिवार को मैं दाखिला के लिए प्रतीक्षारत दर्जनों नए मरीजों की जांच करता हूँ। मैं उनके बीच यह देखकर बहुत दुखी हूँ कि एक बहुत बड़ी संख्या में लोग तम्बाकू के विभिन्न रूपों के प्रति अपनी लत के कारण मुँह या गले के कैंसर से पीड़ित हुए हैं।
ये मरीज पूरे भारत से विभिन्न राज्यों से आते हैं। लेकिन मैं अत्यंत दुख के साथ आपको सूचित करना चाहता हूँ कि उनमें में से एक बहुत बड़ा हिस्सा आपके राज्य से आता है। पिछले कुछ-एक सप्ताह मेंकैंसर के 20 मरीजों में से मरीज उत्तर प्रदेश के गौरवशाली राज्य से आए थे।
मुझे उनका परिचय देने दीजियेः
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1) श्रीमानयह उत्तर प्रदेश के जलगांव जिले के पास स्थित उरई से 28 साल के राजकमल प्रजापति हैं। वह गुटके और सिगरेट,दोनों की लत थी। उनकी जिंदगी की रक्षा करने के लिए कैंसर के फैलने को रोकने के लिए 28 अगस्त को उनकी जीभ का हिस्सा और उनके निचले जबड़े के अंदरूनी भागों को हटा दिया गया था।
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2) जौनपुर के 47 साल के राकेश रंजन सिंह एक स्कूल अध्यापक और दो बच्चों के पिता हैं। उनके गाल पर कैंसर पाया गया था। आज वह एक अंगुली तक डालने के लिए अपना पर्याप्त मुँह नहीं खोल पाते हैं। इसलिए वह अपने मुँह को खोलने के लिए एक चम्मच और अंगुलियां इस्तेमाल करते हुए मिक्सर में पिसी हुई दूध-रोटी खाते हैं। चूंकि उनका कैंसर उन्नत चरण में हैसर्जरी शायद उनकी जिंदगी की रक्षा करने के लिए नाकाफी हो। उन्होंने हमें बताया है कि पान चबाने वाले उनके एक दोस्त का कुछ-एक महीने पहले बनारस में कैंसर का ऑपरेशन हुआ था।
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3) उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के 51 साल के मोहम्मद अजाजूर रहमान लगातार कांपते रहते हैं। वह एक योग्य बिजली इंजीनियर हैं और नगरपालिका में काम करते हैं। मुँह और कैंसर में उन्नत चरण के कैंसर के बावजूदजो साफ दिखाई देता हैउनका एक दिन में10 पहलवान छाप बीड़ी पीना लगातार जारी हैऔर इस लत को त्याग पाने में अपनेआपको बेबस पाते हैं।
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4) 62 साल के सेवानिवृत्त मेजन जनार्दन लाल श्रीवास्तवमहाराजगंज जिले में लोक दल के जिला अध्यक्ष हैं। अगस्त, 2012 के मध्य मेंजब उनकी आवाज काफी कर्कश हो गई तब उनके मुँह के पिछले हिस्से में कैंसरजन्य ट्यूमर पाया गया था। फिर भी उन्होंने आदतन 5-6 सिगरेट रोजाना पीना जारी रखा हुआ है।
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5) 32 साल के दिनेश चंद शर्माउत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में बवार से आए हैं। वे एक मोटरसाइकिल मैकेनिक और गैराज मालिक हैंऔर खैनी तम्बाकू और चूने का मिश्रण खाने के शौकीन हैं। उन्होंने सिर्फ दो साल पहले ही इसको खाना शुरू किया थाऔर वो भी शाम को केवल 2-3 बार। दुर्भाग्यवशखैनी खाना शुरू करने महीने के बाद उनके गाल के अंदर एक ट्यूमर पैदा हो गया जहां वह तम्बाकू की चुटकी रखा करते थे। अब उनका कैंसर तेजी से उनकी जीभ में फैल रहा है और उन्हें साफ बोल पाने में बहुत कठिनाई हो रही है। उनकी जीभ को सर्जरी द्वारा हटाना एक विशिष्ट संभावना है जो डाक्टरों और सर्जनों की हमारी टीम के सामने खड़ी है।
महोदयमेरे सहकर्मी और मैं आपका ऐसे अनेक मरीजों से परिचय करवा सकते हैं जो हरेक सप्ताह उत्तर प्रदेश से टाटा मैमोरियल अस्पताल में आते हैं। लेकिन मुझे उम्मीद है कि ये पांच काफी रहेंगे।
इस मामले की तात्कालिकता के प्रत्युत्तर मेंहाल ही में केंद्र सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी दिशानिर्देशों का पालन करते हुए 13 राज्यों ने गुटके और पान मसाला पर पाबन्दी लगा दी है। इन राज्यों में दिल्लीमध्य प्रदेशकेरलबिहारमहाराष्ट्र,हिमाचल प्रदेशराजस्थानहरियाणाझारखंडछत्तीसगढ़गुजरातमिजोरम और पंजाबचंडीगढ़ संघशासित क्षेत्र शामिल हैं। निश्चित तौर पर वे सभी गलत नहीं हैं?
अगस्त, 2011 को स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानदंड प्राधिकरणद्वारा जारी अधिसूचना स्पष्ट है। इसमें कहा गया है, "उत्पाद में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक कोई पदार्थ मौजूद नहीं होगाः तम्बाकू और निकोटीन को किसी भी खाद्य उत्पाद में संघटक के रूप में प्रयोग नहीं किया जाएगा।इसलिए सभी धुआं मुक्त तम्बाकू उत्पाद जैसे गुटकाखैनी आदि अपनेआप वर्जित हैं। यह खाद्य संरक्षा और मानदंड अधिनियम, 2006, और भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानदंड प्राधिकरणस्वास्थ्य मंत्रालय के प्राधिकार से है।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान (NIHFW) द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में भ्रामक नाम"धुआं मुक्त तम्बाकूसे भारत में लाखों लोगों को होने वाली प्राणाघातक बीमारियों को प्रमाण दिया गया है। कृपयाhttp://tiny.cc/Report-NIHFW-SC पर इस रिपोर्ट को पढ़िये।
श्रीमानआपके पास उत्तर प्रदेश में इस निषेधाज्ञा को लागू करने के लिए निर्विवाद शक्ति और जनादेश है। लेकिन मुझे यह देखकर दुख हो रहा है कि आपकी सरकार यह बहस करने में समय बर्बाद कर रही है कि क्या गुटका और पान मसाला को खाद्य पदार्थ कहा जा सकता है। गोदावत पान मसाला मुकदमे मेंमाननीय सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि पान मसाला या गुटका खाद्य पदार्थ है। केरलबिहार और अन्य राज्यों के माननीय उच्च न्यायालयों ने भी स्वतंत्र रूप से यह सही ठहराया है कि गुटका और पान मसाला"खाद्य पदार्थहैं जैसा कि इस अधिनियम के अंतर्गत परिभाषित है। निश्चित तौर पर विद्धान न्यायमूर्तिगण गलत नहीं हो सकते?
अगर उत्तर प्रदेश की सरकार अपने नागरिकों के बारे में इतनी कम परवाह करती हुई दिखाई देती है कि वह कानून के एक सुलझे हुए मामले पर अपने पैर घसीट रही है तो हमें बहुत दुख होगा।
अखिलेश जीजिस दौरान आपके FDA आयुक्त और अन्य दफ्तरशाह काल्पनिक मसलों पर कानूनी बहस में उलझे हुए हैंउस दौरान आपके राज्य में लोग मर रहे हैं। तम्बाकू उद्योग लाखों मासूम लोगों को अपना लतेड़ी बना रहा हैजिससे हजारों लोग सर्जरी के बाद पंगु और विकृत हो रहे हैंऔर सैकड़ों मारे जा रहे हैं। गुजरने वाले हरेक महीने के साथजिंदगियां खत्म हो रही हैं और परिवार बर्बाद हो रहे हैं।
मदोहयकृपया बिल्कुल विलंब नहीं कीजिये। गुटका और पान मसाला पर तुरंत पाबन्दी लगाइये।

सादर,
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डापंकज चतुर्वेदी,
कंसल्टेंट सर्जन,
टाटा मैमोरियल अस्पतालमुम्बई
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अधिक जानकारी के लिएकृपया संपर्क करेः अशीमा सरीनप्रोजेक्ट डायरेक्टर - VoTV - +91-8860786604
हाई रेज़लूशन फोटो https://www.box.com/s/lckkz3g59291o1cfvhyq से डाउनलोड करें।
VOTV की ओर से कृश             9821588114       द्वारा जारी
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Monday, March 5, 2012

College Refuses to Receive RTI by Hand


A college (S V College) in Aligarh (Uttar Pradesh) refuses to receive RTI related papers by hand.

Wednesday, January 25, 2012

HC quashes UP govt notifications on RTI Act

PTI | 10:01 PM,Jan 25,2012: Lucknow, Jan 25 (PTI) The Allahabad High Court today quashed two notifications by Uttar Pradesh government which excluded confidential section under Home and Civil Aviation departments from the purview of RTI Act, saying restrictions imposed were excessive and beyond the powers of the state. The order was passed by a Lucknow bench comprising justices Pradeep Kant and Decvendra Kumar Upadhyaya while allowing two Public Interest Litigations challenging the notifications issued by the state government. On June 7 2009, a notification was issued excluding certain works alloted to conidential sections of the state government from the purview of RTI Act. Prior to this, one more notification was issued on March 25, 2008 which specified that the operation unit, the maintenance, security and general administration unit of the civil aviation department of the state were excluded from the applicability of the RTI Act. The court in its order observed that the RTI is part and parcel of the right to freedom of speech and expression as contained in the Constitution. Further the RTI Act gives statutory safeguard to the freedom of speech and expression guaranteed in the Constitution, which cannot be curtailed except with reasonable restrictions, it said. The court said that therefore restrictions imposed were excessive and beyond the powers of the state, which cannot be done by issuance of the impugned notifications. "For the aforesaid reason petitions are allowed and both the notifications being invalid or hereby quashed," it said.

Friday, April 15, 2011

PIO Hits Back, Files RTI on Activist!

RTI Activist Mr Tapil Kumar, Resident of Shahpur-Qutub, District Aligarh, Uttar Pradesh, got the shock of his life when the Mr Surendra Pal Singh, Public Information Officer (PIO), Nagar Panchayat, Harduaganj, retaliated and filed an RTI on him by sending a postal order of Rs 10 along with six questions!
Mr Kumar had posed queries related to assets of the husband of Chairman of the Nagar Panchayat and this did not go down well with the PIO.